भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्य के दौरान मृतक कर्मी को, गृह ग्राम तक पहुंचाने की जाए व्यवस्था

भिलाई : मृतक कर्मी को ग्रह ग्राम तक पहुंचाने की नीति बनाने हेतु आज श्रमिक संगठन सीटू ने निदेशक (कार्मिक), “सेल” नई दिल्ली, के नाम औद्योगिक सम्बन्ध विभाग, भिलाई इस्पात संयंत्र को ज्ञापन सौंपा ।

भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्य के दौरान मृतक कर्मी को, गृह ग्राम तक पहुंचाने की जाए व्यवस्था

ज्ञातव्य हो कि पहले भिलाई इस्पात संयंत्र में सारी नियुक्तियां स्थानीय रोजगार केंद्रों के माध्यम से होती थी, तब से यह व्यवस्था लागू है कि, अनुरोध पर, ग्रह ग्राम तक मृतक कर्मी के शव को ले जाने की व्यवस्था संयंत्र के तरफ से की जाएगी ।

अन्य राज्यों से आये कर्मियों को भी मिले सुविधा –

सीटू के संगठन सचिव रविशंकर ने बताया कि, वर्तमान समय में “भिलाई इस्पात संयंत्र” सहित “सेल” के सभी इकाइयों में होने वाली भर्तियां राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी हैं, जिसके चलते कई कर्मचारी अन्य राज्यों से भी आते हैं ।

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इनमें से अधिकांश कर्मचारी यही निवास करते हैं, तथा नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाने पर उनका अंतिम संस्कार भी यहीं होता है । अपवाद स्वरूप कुछ कर्मियों को, उनके गृह ग्राम में, अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की बाध्यता रहती है ।

सीटू ने सेल प्रबंधन से मांग की है कि ऐसी स्थिति में सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए, मानवीय आधार पर उनके शव को उनके गृह ग्राम तक भेजे जाने की व्यवस्था होनी चाहिए ।

कंपनी अपने सेवानिवृत्त कर्मियों को गृह ग्राम जाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है, यह सुविधा मृत कर्मी के लिए इस स्वरूप में प्रदान की जानी चाहिए ।

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इस मांग को पूरा करने में स्थानीय प्रबंधन असमर्थ –

हृदयाघात से मृत यू.आर.एम. के ट्रेनी स्व.टी.के.सिंह के पार्थिव शरीर को पोस्ट मार्टम के बाद उनके गृह ग्राम आरा, बिहार भेजने के बाद सी आई टी यु ने भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन को पत्र के माध्यम से यह मांग किया था, कि अन्य राज्यों से आये हुए कर्मियों में से नौकरी के दौरान दुर्भाग्यवश किसी की मृत्यु हो जाने पर आवश्यकता अनुशार मृत कर्मियों को उनके गृह ग्राम ले जाने की सुविधा दी जनि चाहिए ।

किन्तु प्रबंधन ने कारपोरेट गाइड लाइन का हवाला देते हुए ऐसा करने में अपनी असमर्थता जाहिर की ! इसी लिए सीटू ने “निदेशक – सेल” को पत्र देकर इस हेतु उचित निर्णय लेकर आवश्यक गाइड लाइन जारी करने की मांग की है ।

[रिपोर्ट – घनश्याम जी. बैरागी]

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