बच्चा सब देखता है

प्रस्तुत पंक्तियों में कवियत्री दुनियाँ को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि हमे एक छोटे बच्चे को बच्चा समझने की भूल नहीं करनी चाहिये क्योंकि बच्चा हमारा हर व्यवहार देखता है और हमसे सीखता है। हम टीवी पर कौनसा चैनल उसके सामने देख रहे है कौनसी मूवी में जा रहे है घर में हमारा व्यवहार उसके साथ व दूसरे लोगो के साथ कैसा है एक छोटा बच्चा ये सब देखता है और फिर उसे ही वो जीवन का सच मानने लगता है।Childrenबच्चे में अपनी समझ बस इतनी ही होती है की उसे जो दिखता है वो उसी को ही सच मान लेता है। माता पिता को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है अपने बच्चे को पालने में, बस माता पिता को इस बात को हमेशा याद रखना है कि जितने समझदार वो है उनका बच्चा इतना समझदार नहीं है इसलिए कभी-कभी माता पिता को भी बच्चा बनना पड़ता है अपने बच्चे को समझाने में। याद रखना दोस्तों जीवन का असली खजाना रुपया-पैसा नहीं हमारे बच्चे होते है आज आप उनके खातिर थोड़ी तकलीफ सहलो कल वो आपका सहारा बनेंगे।

अब आप इस कविता का आनंद ले।

बच्चे को बच्चा समझ,
उसके सामने कभी कुछ गलत काम न करना।
उसकी मासूमियत को समझ,
उसके संग उसके जैसा व्यवहार तुम करना।
इन बच्चो के दिमाग के खाली किताब के पन्ने,
तुम्हे अपने व्यवहार से सजाने है।
तुम्हारा रुपया पैसा नहीं,
ये बच्चे ही तुम्हारे असली खजाने है।
कोई तो उन्हें डाट के समझाता है।
तो कोई बिना कुछ कहे ही, अकेले में कही अश्क बहाता है।
तुम्हारे खुदका व्यवहार,
आने वाले कल में तुम्हे इन बच्चो में नज़र आयेगा।
उस परिस्थिति के रहते,
तुम्हे अपना बीता कल याद नहीं आयेगा।
हर दिन बच्चा कुछ न कुछ अनोखा सीखता है।
अपनी न समझी के कारण ही,
वो अपने माता-पिता पर चीखता है।
उसके चीख़ने पर भी तुम्हे प्यार से उन्हें मनाना है।
आने वाले कल का आशियाना,
तुम्हे अपने आज से कर्मो से जगाना है।

धन्यवाद

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