पद्मावती विरोध: भाजपा को छोड़कर करणी सेना में शामिल हुए सुरजपाल सिंह जी

बीती 30 नवंबर को श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रेस मिडिया प्रकोष्ठ के पुष्पेंद्र सिंह ने श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह के आधिकारिक facebook page @SukhdevSinghGogamedi पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि पिछले 28 सालों से भाजपा संगठन में तन मन धन से जुटे रहने वाले भाजपा के वरिष्ठ राजपूत नेता सूरजपाल सिंह नें पार्टी में निष्ठावान समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर क्षुब्ध हो, हरियाणा भाजपा संगठन के मीडिया समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण पद से इस्तीफा दे, अपनी कौम के लिए काम करने के लिए श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना में “राष्ट्रीय संगठन महामंत्री” का काम संभाला है। SurajPal Singhउन्होंने आगे लिखा है कि,सुरजपाल सिंह अम्मू को भाजपा संगठन ने एक सभा और बाद में मीडिया में पद्मावती फिल्म के विरोध में आक्रामक रूप से उस फिल्म के निर्माता निर्दशक और अभिनेताओं के खिलाफ फतवा जारी करने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर रखा था ।

इस पोस्ट में सूरजमल जी के भाजपा छोड़ने के कारण को बताते हुए आगे लिखा है,की परसों यानि 2 दिन पहले दिल्ली के हरियाणा हाउस में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी खट्टर द्वारा पद्मावती फिल्म को हरियाणा राज्य मे बैन करने के मुद्दे पर, श्री राष्ट्रीय करणी सेना के राजपूत मुखियाओं के प्रतिनिधि मंडल से समय देकर भी ना मिलना एक तरह से अपमान करना अखर गया कि एक मुख्यमंत्री का किसी समाज के मुखियाओं के साथ, अपनी ही पार्टी के मुख्य पदाधिकारी साथ होने पर भी इस तरह का व्यवहार निदनीय है।

आगे लिखते हुए बताते है कि उस प्रतिनिधि मंडल में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह जी गोगामेड़ी साथ ‘अम्मू’ स्वंय मौजूद थे.. और इसे उन्होने क्षत्रिय राजपूत समाज के साथ, सुखदेव सिंह जैसे राष्ट्रीय राजपूत नेता का भी अपमान माना । और आज उन्होने भारतीय जनता पार्टी के समस्त पदों से दायित्वों से अपने आप को मुक्त कर लिया। और आज जयपुर में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की विशेष बैठक और संवादाता सम्मेलन बीच इस क्षत्रिय संगठन में राष्ट्रीय संगठन मंत्री का दायित्व संभाल लिया ।

“उपर्युक्त जानकारी श्री राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह के आधिकारिक facebook page @SukhdevSinghGogamedi से ली गई है।”

[स्रोत- विनोद रुलानिया]

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