फिर भी

इन्साफ मांगता गरीब

Insaaf Mangta Gareeb kavita

प्रस्तुत पक्तियों में कवियत्री दुनियाँ से ये पूछ रही है कि जैसे अमीरों की तनख़्वाह में बढ़ौतरी होती हैं, वैसे गरीबों को तनख़्वाह क्यों नहीं बढ़ती, क्यों हम सिर्फ गरीब से हर कार्य में मोल भाव करते हैं, उसकी अपनी भी तो गृहस्थी हैं, उसके अपने बच्चे भी तो अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं. अगर हम आज की बात करे तो मैंने देखा, चाहें हम सब्जी खरीदे या अपने घर या ऑफिस के नौकरो से या चौकीदार से रुपये सम्बंधित बहुत मोल भाव करते हैं।

मेरी नज़र में ये लोग भीख तो नहीं मांग रहे तो क्यों इनकी तनख़्वाह बढ़ाई नहीं जाती, और जिन विद्यालय में ये लोग अपने बच्चों को भेजते हैं, वहॉं ठीक से पढ़ाया नहीं जाता, ये लोग अपनी छोटी छोटी ख्वाहिश भी पूरी नहीं कर पाते क्योकि इनका गुनाह बस इतना है कि ये गरीब हैं और क्यूंकि इनकी तनख़्वाह इतनी बढ़ाई नहीं जाती तो इनकी आगे आने वाली पीड़ी भी गरीब रह जाती हैं।

एक और बात जो इस समाज में चल रही है वह हैं अंग्रेजी बोलने वाले लोग हिंदी बोलने वालों का अपमान करते हैं, इस ज़माने में अंग्रेजी बोलने वाले को राजा और हिंदी बोलने वाले को तुच्छ समझा जाता हैं। अंग्रेजी बोलने वाले को ज़्यादा तनख़्वाह और हिंदी बोलने वाले को कम तनख़्वाह मिलती हैं।

अब आप इस रचना का आनंद ले।

एक गरीब का दर्द,
बस एक गरीब ही जानता हैं।
अपनी इच्छाओं को दबाकर,
बस ईश्वर से हर रोज़, इंसाफ वो मांगता हैं।
अंग्रेज़ी ठीक से न बोलने की वजह से,
इस दुनियाँ के तानों से वो हर रोज़ मरता हैं।
बस हिंदी के भरोसे जी तोड़ मेहनत,
वो आजीवन करता हैं।
नहीं समझता अंग्रेजी ,इसमें उसकी तो कोई गलती नहीं।
नीचा दिखाये जो उसे इस बात पर,
मेरी नज़रों में तो गुनाहगार हैं बस वहीं।
उसके घर की गंदगी सबको दिखती हैं।
पर उसकी कुशलता कहाँ इस दुनियाँ में महंगी बिकती हैं ??
अमीरों की तनख़्वाह, जिस रफ़्तार से बढ़ाई जाती हैं।
उस रफ़्तार की धीमी चाल भी ,गरीबों तक पहुँच नहीं पाती हैं।
फिर क्यों दुनियाँ की हर चीज़ सबके लिए,
एक ही दाम पर बिकती हैं ??
देख करोड़ो का दुख,
ये कवियत्री हर रोज़ किसी के हक़ में लिखती हैं।
क्या दिलायेगा कोई इन्साफ इन सीधे सादो को??
क्या मिलेंगी राहत, इनके संघर्षो की यादों को??
या आज भी अंग्रेजी और अमीरी मासूमों के जज़्बातों को कुचलती जायेगी।
जब तक हैं ये कवियत्री इस दुनियाँ में,
ये यूँ ही मासूमों के हक़ में लड़ती जायेगी।

विशेष:- ये पोस्ट इंटर्न प्रेरणा महरोत्रा गुप्ता ने शेयर की है जिन्होंने Phirbhi.in पर “फिरभी लिख लो प्रतियोगिता” में हिस्सा लिया है, अगर आपके पास भी है कोई स्टोरी तो इस मेल आईडी पर भेजे: phirbhistory@gmail.com.

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