व्यावसायिकता, भ्रष्टाचार को रोकने के लिये अब शिक्षक भर्ती पारदर्शी होगी

राज्य के जिला परिषद, नगरपालिका, नगर निगम और निजी अनुदानित विद्यालयों में, 30,000 से अधिक शिक्षकों और मुख्यालयों के पद रिक्त हैं. शिक्षा विभाग ने इन पदों को भरने के लिए एक अलग व्यवस्था की है शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने विश्वास व्यक्त किया है कि शिक्षको कि भर्ती में किसी तरह के भ्रष्टाचार को जगह नहीँ होगी।Teacher Recuirment

[Image Source: AmarUjala]

राज्य में 66 हजार जिला परिषद स्कूल हैं और 20,000 अनुदानित निजी स्कूल और नगर निगम और नगर निगमों में एक लाख दो हजार स्कूल हैं. स्कूलों में खाली विद्यालयों में लगभग 30,000 पदों के शिक्षकों और शिक्षकों के पद हैं, और कई अन्य विधायकों ने शिकायत की है कि संस्थागत शिक्षकों की भर्ती नहीं कर रहे हैं, जब तक उन्हें निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में लाखों रुपये नहीं दिए जाते हैं. शिक्षा विभाग ने सीईटी परीक्षा में कलेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अधिकारियों को शिक्षकों की भर्ती में पारदर्शिता लाने का प्रावधान किया है और निजी स्कूल के अधिकारियों को उन शिक्षकों की एक सूची देने के लिए कहा गया है जिनकी उन्हें जरूरत है।

यह सब प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है और यह निर्णय लिया गया है कि राज्य के लिए केवल ‘योग्यता परीक्षण’ के आधार पर शिक्षकों की भर्ती होगी .इसलिये एक विज्ञापन जारी कर शिक्षकों की एक सूची जारी की हे जिससे कि सब्सिडी वाले निजी शिक्षा संस्थानों और संबंधितों को जरूरत योग्य शिक्षकों को चुँनना अनिवार्य बना दिया गया है।

महाराष्ट्र निजी विद्यालय अधिनियम, 1981 के तहत जिन शिक्षकों को ज़रूरत हे उन्हे चुन सकते हे.हालांकि, शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी ने कहा कि वह अपने संगठन में शिक्षक को योग्यता परीक्षा में चयनित शिक्षकों को लेना अनिवार्य किया गया है।

शिक्षक भर्ती के लिये सरकारने ‘पवित्र‘ नाम का पोर्टल बनाया हे जिसपर अब तक 93,000 लोगों अपना नाम दर्ज किया है।

[स्रोत- धनवंत मस्तुद]

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