यह केवल रोहिंग्या मुसलमानों का नहीं मानवाधिकारों का भी मामला है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या मुसलमान मामले पर अपना नया फैसला सुनाते हुए सुनवाई की अगली तारीख 21 नवंबर कर दी है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकारों का हवाला देते हुए यह भी कहा है कि यह एक साधारण मामला नहीं है जो बिना सोचे-विचारे इस मामले पर फैसला सुना दिया जाए.

rohingya

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाने के साथ साथ केंद्र को यह आदेश भी दिया है कि जब तक इस मामले की अगली तारीख तक कोई भी रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी वापस नहीं भेजा जाना चाहिए अगर केंद्र किसी प्रकार की कोई अकस्मात योजना बना भी लेता है तो उसकी सूचना सर्वप्रथम सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि हमें संतुलन नहीं तोड़ना चाहिए यह एक साधारण मामला नहीं है इस मुद्दे में कई लोगों के मानवाधिकार शामिल है. यहां सिर्फ राष्ट्र सुरक्षा को ही नहीं मानवाधिकारों को भी संज्ञान में रखना होगा क्योंकि यह एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है.

भारत में अबतक 40,000 रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों के रूप में रह रहे हैं, माना जा रहा है कि इनमें से 16,000 के पास वैध शरणार्थी दस्तावेज हैं मगर 21 सितंबर को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बयान की मानें तो उन्होंने कहा है कि इन 16,000 रोहिंग्या मुसलमानों ने भी शरणार्थी के लिए जो प्रोसेस होता है उस वेरिफिकेशन को पूरा नहीं किया है.

[ये भी पढ़ें: जब म्यांमार रोहिंग्या मुसलमानों के लिए बाहें फैला रहा है, तो फिर भारत में क्यों हो रही हैं बहस]

अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए राजनाथ सिंह ने यह भी कहा था कि रोहिंग्या मुसलमान राष्ट्र सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है जिस कारण  इनको देश में रहने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है. 19 सितंबर को म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि म्यांमार रोहिंग्या मुसलमानों के लिए रिफ्यूजी वेरिफिकेशन चला रहा है चीन को वापस आना है उनके लिए मेहमान बाहें फैलाए खड़ा है.

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