खुश रहने का हक़ हम सबको है।

प्रस्तुत पंक्तियों में कवियत्री दुनियाँ को खुश रहने की प्रेरणा दे रही है। वह कहती है कि इस दुनियाँ में सबको हक़ है खुश रहने का दूसरों की सुन अपनी भी बात खुल के कहने का.कवियत्री कहती है कि ख़ुशी हमसे कही बाहर नहीं ख़ुशी हमारे अंदर ही होती है। वह कहती है कि नदियाँ से हमे जीवन का ज्ञान सीखना चाहिये जैसे वो अपने दायरे में ही बहती है हमे भी अपनी क्षमताओं को समझ कर बस उसी को बढ़ाने में मन लगाना चाहिये।

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खुदकी तुलना किसी से न करके सबकी क्षमताओं की प्रशंसा करनी चाहिये। यही एक मात्र रास्ता है इतिहास के पन्नो में जगमगाने का। याद रहे कभी किसी को अपनी बात ज़बरदस्ती समझाने की कोशिश मत करना क्योंकि जिसे आपकी बात सुननी है वो आपके बिना कहे भी सुन लेना और जो नहीं सुनना चाहता वो आपके कहने पर भी आपकी बात नहीं सुनेगा इसलिए कुछ चीज़े वक़्त पर छोड़ देनी चाहिये। सफलता पाकर कभी घमंड न करना और कभी किसी को कम मत समझना क्योंकि हम सब के अंदर अनोखी कलाये है बस फर्क इतना है कोई उन क्षमताओं को जगाता है तो कोई थोड़ासा पाकर ही खुश हो जाता है।

अब आप इस कविता का आनंद ले।

सबको हक़ है दुनियाँ में खुश रहने का,
नदियाँ का तो काम ही है.
अपने दायरे में रहकर,चुप चाप बहने का।
अपने काम में, मगन रहकर, हर कोई खुश रह सकता है।
अपनी ख़ुशी के हक़ में,हर कोई,अपनी बात कह सकता है।

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जो न समझे तुम्हे, उसे ज़्यादा न समझाना।
हम सबके अंदर ही, छुपा है ,सबकी खुशियो का खज़ाना।
उस ख़ज़ाने को जिसने भी पाया,
बन बैठा वो खुदका ही दिवाना .
किसी को भी कम समझकर,
तुम कभी अपनी सफलता पर मत इतराना।

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प्रशंसा करके हर एक के गुणों की,
ख़ुशी की ऐसी राह तुम सबको दिखाना।
करके ऐसे खुश सबको,
इतिहास के पन्नो में, फिर तुम ही जगमगाना।

धन्यवाद

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